राजस्थानी शब्दकोश परियोजना – परिचय

परियोजना उद्देश्य: सम्पूर्ण राजस्थानी शब्दकोश को ऑनलाइन बनाकर इसकी मोबाइल एप तथा वेबसाइट बनाना

भूमिका: भाषा मनुष्य के विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के माध्यम से ही मानव ने अपना सांस्कृतिक एवं भौतिक विकास किया है, किन्तु इसके साथ ही यह भी सत्य है कि मानव के विकास के साथ भाषा का भी विकास होता है। इस दृष्टि से दोनों का विकास अन्योन्याश्रित है। राजस्थानी भाषा अपनी समृद्ध साहित्यक धरोहर एवं लगभग ढाई लाख शब्दों से भी अधिक के विशाल शब्द भंडार के साथ भारत वर्ष की सभी प्रादेशिक भाषाओं में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। इसके बावजूद यह देखने में आया है कि राजस्थानी भाषा के प्रति प्रदेश के भाषा-साहित्य के विद्यार्थियों  / शौधार्थियों की अभिरुचि  कम हुई है।  इक्कीसवीं सदी डिजिटल तकनीकी का युग है जिसमे आज का युवक, ज्ञान को इन्टरनेट, मोबाइल इत्यादि ऑनलाइन संसाधनों से प्राप्त कर रहा है | ऐसे में बहुत जरूरी है कि राजथानी भाषा की समृद्ध साहित्यिक धरोहर एवं मायड़ भाषा के शब्द-कोश को डिजिटल धरातलों पर उपलब्ध करवाया जाए। ऑनलाइन शब्दकोश  मायड़ भाषा राजस्थानी के भाषा प्रेमियों, कवियों, पाठकों एवं छात्रों के लिए एक बहुमूल्य उपकरण सिद्ध होगी।

ऑनलाइन शब्दकोश बनकर कैसा लगेगा इसका लगभग अंदाजा आपको गुजराती ऑनलाइन शब्दकोश “भगवद-गोमंडल” की वेबसाइट को देखकर लग जाएगा। इसके लिए आप यहाँ क्लिक करें

कार्य का परिमाण: राजस्थानी भाषा के शब्दकोशों के इतिहास में जाएँ तो भिन्न भिन्न विद्वानों द्वारा संकलित अनेक प्रकार के शब्दकोश मिलते हैं जैसे ‘पाइयलच्छीनाममाला’, ‘अभिधानचिन्तामणिनांममाला’, ‘अनेकारथी संग्रै’, ‘देसी सबद संग्रै’, ‘डिंगल नांममाला’, ‘नागराज डिंगल कोस’, ‘हमीरनांममाला’, ‘अवधान-माला’, ‘डिंगलकोस’, ‘अनेकारथी कोस’, ‘एकाखरी कोस’, ”एकाखरी-नांममाला’, ‘मान मंजरी’, ‘राजस्थानी सबद कोस’ इत्यादि। जैसे जैसे नए शब्दकोश बनते गए वैसे वैसे उनमे शब्दों की संख्या भी बढती गयी। सबसे बड़ा संकलन डॉ. सीताराम लालस द्वारा ‘राजस्थानी सबद कोस‘ के नाम से 1962 में प्रकाशित हुआ था। 7772 पृष्ठों के इस वृहत शब्दकोश में कुल लगभग दो लाख शब्द हैं तथा राजस्थानी भाषा के व्याकरण एवं साहित्य की भी विस्तृत जानकारी है। इसके पश्चात इसी का छोटा रूप भी ‘राजस्थानी-हिन्दी छोटो सबदकोस’ के नाम से आया जिसमे शब्दों की व्याख्या छोटी है किन्तु शब्दों की संख्या अब तक के सभी शब्दकोशों में सर्वाधिक है। शब्दकोशों के उक्त समृद्ध इतिहास को मद्देनजर रखते हुए इस परियोजना के लिए लगभग 2,50,000 शब्दों को ऑनलाइन करने का आंकलन है। ऑनलाइन करने के लिए सबसे पहले विभिन्न शब्दकोशों के शब्दों को डिजिटाइज़ करना होगा जिसके लिए डाटा एंट्री करने का एक ऑनलाइन तंत्र बनाना होगा जहां एक अधिकृत यूजर लॉग-इन करके शब्दों को टाइप कर सके। हर शब्द को अलग अलग भागों (मूल शब्द, शब्द प्रकार – संज्ञा, सर्वनाम इत्यादि, शब्दार्थ, उत्पत्ति, पर्यायवाची, मुहावरे, कहावतें, रेफ़रेंस, शब्द प्रयोग आदि) में तोड़ कर उनके लिए बनाये गए अलग अलग फील्ड में टाइप करना होगा जो काफी जटिल एवं समय लेने वाला कार्य है।

ओसतन एक व्यक्ति एक दिन में 100 शब्द तक की डाटा-एंट्री शब्द-विन्यास के साथ कर पायेगा ऐसा मेरा अनुभव के आधार पर आंकलन है। (2,00,000 / 100 = 2,000) अतः इस गति से एक व्यक्ति के लिए यह करीब 2,500 दिनों की डाटा-एंट्री का कार्य है। यदि एक वर्ष में हम 300 कार्यदिवस मान कर चलें तो (2,000 / 300 = 6.66) अर्थात एक वर्ष में 300 कार्य-दिवस के आधार पर एक व्यक्ति के लिए यह कार्य लगभग 6.6 वर्ष का है और इसी आधार पर यदि 6 से  7 व्यक्ति इस कार्य को एक साथ करें तो वे इसे एक वर्ष में पूर्ण कर सकते हैं।

डाटा-एंट्री होने पर उसे एक-दो बार एडिटिंग / प्रूफ रीडिंग करके प्रमाणिक करना होगा। तत्पश्चात इसके ऑनलाइन-शब्दकोश का सॉफ्टवेयर बनेगा तथा इसकी मोबाइल एप (एंड्राइड और आईफ़ोन पर) बनेगी।

खर्च का आंकलन: 6  लोगों की एक वर्ष की सैलेरी @15000/- प्रति माह प्रति व्यक्ति (कंप्यूटर तथा ऑफिस/सीट खर्च सहित) के हिसाब से 12 लाख रुपये तथा सॉफ्टवेयर (ऑनलाइन वेब एवं मोबाइल एप) बनाने का समस्त व्यय लगभग 2 लाख रुपये और होस्टिंग सर्वर/बैंडविड्थ इत्यादि को मिलाकर लगभग 15 लाख रुपयों का समस्त परियोजना खर्च का आंकलन है। टीम का भरसक प्रयास रहेगा कि इस परियोजना को जितना हो सके कम से कम व्यय करते हुए पूर्ण करे। यदि इसमें कुछ भी राशि बच पायी तो उसका इस्तेमाल वेबसाइट को होस्ट करने के लिए सर्वर के किराये के रूप में तथा राजस्थानी भाषा के विकास से सम्बंधित ही किसी कार्य में समायोजित किया जाएगा।

कार्य योजना: 15 लाख की राशि जुटाने का कार्य सर्वप्रथम है। राशी बहुत अधिक नहीं है। यदि सिर्फ 150 दानदाता भी 10,000 रुपये प्रति व्यक्ति सहायता करे तो यह राशि इकट्ठी हो जाएगी। यह ओसत आंकलन है। कोई इससे कम या इससे अधिक भी सहयोग करता है तो स्वागत है। अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार आप अपने अंशदान का निर्णय करें। सहायता राशी भेजने  से सम्बंधित जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें