पद्मश्री डा. सीताराम जी लालस

पद्म श्री डा. सीताराम जी लालस (सीताराम जी माड़साब के नाम से जनप्रिय) राजस्थानी भाषा के भाषाविद एवं कोशकार थे। आपने ४० वर्षों की अथक साधना के उपरान्त “राजस्थानी शब्दकोष” एवं “राजस्थानी हिंदी वृहद कोष” का निर्माण किया। यह विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोष है जिसमे 2 लाख से अधिक शब्द, १५ हज़ार मुहावरें/कहावतें, हज़ारों दोहे तथा अनेकों विषय जैसे कृषि, ज्योतिष, वैदिक धर्म, दर्शन, शकुन शास्त्र, खगोल, भूगोल, प्राणी शास्त्र, शालिहोत्र, पशु चिकित्सा, संगीत, साहित्य, भवन, चित्र, मूर्तिकला, त्यौहार, सम्प्रदाय, जाति, रीत/रिवाज, स्थान और राजस्थान के बारे में जानकारी एवं राजस्थानी की सभी उप भाषाओं व बोलियों के शब्दों का विस्तार पूर्वक एवं वैज्ञानिक व्याकर्णिक विवेचन है। इस अभूतपूर्व कार्य के लिए स.१९७७ में भारत सरकार ने आपको पद्मश्री से सम्मानित किया। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर ने आपको मानद पी.एच.डी. (डाक्टर ऑफ़ लिटरेचर) की उपाधि प्रदान की।
जोधपुर दरबार मानसिंह जी का जालोर के घेरे में जिन १७ चारणों ने साथ दिया था उनमे से एक थे नवल जी लालस जिनको सांसण में नेरवा गाँव मिला था।[…]

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राजस्थानी-भाषा की मान्यता का सवाल – डॉ. आईदान सिंह भाटी

जब भी किसी भाषा के सम्बन्ध में बात चलती है तो मुझे अनायास रबीन्द्रनाथ याद आते हैं। उन्होंने अपने बचपन के एक संस्मरण द्वारा मातृभाषा का महत्व समझाया है। विश्व के सारे चिंतक मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को स्वीकारते हैं। भारत की सुप्रसिद्ध-चिंतक रमणिका गुप्ता ने ‘वड़ोदरा गुजरात’ में हुए ‘भाषा रिसर्च एण्ड पब्लिकेशन सेंटर’के एक सम्मेलन का हवाला […]

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